बड़ी खबर: पहाड़ों में घिरे आतंकी, किश्तवाड़ा में गोलियों की गूंज से दहल उठा इलाक़ा

By Mandeep Rohit

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जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ा जिले के घने जंगलों में वो मंजर देखने को मिला, जो सायद ही आज तक आप लोगों ने देखा होगा। किश्तवाड़ा के जंगलों में हर कदम पर खतरा था और हर पल जान जाने का खतरा बना रहता था। इन जंगलों में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई, इस मुठभेड़ ने पूरे इलाके को अलर्ट मोड पर ला दिया।

कहां और कैसे हुई मुठभेड़?

किश्तवाड़ा ऊंचाई वाले जंगलों में सुरक्षा एजेंसियों को आतंकियों की पुख्ता खुफिया जानकारी मिली थी। जानकारी मिलते ही भारतीय सेना ने सर्च ऑपरेशन सुरु कर दिया। भारतीय सेना के साथ साथ जम्मू पुलिस orऔर अन्य सुरक्षा बलों न भी सर्च ऑपरेशन सुरु कर दिया था। सर्च ऑपरेशन सुरु होते ही जवान इस इलाके में आगे बड़े, आतंकियों ने जवानो के दिखते ही अन्धाधुन्ध फायरिंग शुरु कर दी। जवाबी तोर पर जवानों ने भी अपनी अपनी position संभाली और फायरिंग शुरू कर दी। जंगलों में एक दम से खतरनाक माहौल बन गया। दोनों तरफ से जानो का खतरा बना हुआ था। देश को बचाने के लिए जवानों ने अपनी जिंदगी जोखिम में डाल रखी थी और आतंकी देश को खतम करने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे थे।

जंगल बना जंग का मैदन

घंटों तक गोलीबारी चलती रही। मुठभेड़ इतनी तेज थी कि पहाड़ी इलाक़ा पूरी तरह से गूंज उठा। जंगल मे लुके बैठे आतंकियों को चारों ओर से घेरने की कोशिश की गई। लेकिन इस ऑपरेशन के दोरान कई जवान ज़ख्मी हुए। ज़ख्मी जवानों को तुरंत प्राथमिक इलाज दिया गया। कुछ जवानों को एयर लिफ्ट के जरिए हस्पताल पहुंचा दिया गया। जहाँ जवानों का इलाज जारी कुछ। जो जो जवान ज्यादा ज़ख्मी थे उन्हें हस्पताल पहुंचा दिया गया।

ड्रोन, अत्यधिक फोर्स और हाई अलर्ट

मुठभेड़ और गोलीबारी रुकने के बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया। ताकि उस इलाके में कोई नॉर्मल व्यक्ती ना आ सके। इलाके को सील करने के बाद फोर्स के अलावा कोई भी व्यक्ती अंदर नहीं जा सकता उस इलाके में केवल फोर्स ही जा सकती है। ड्रोन के साथ साथ और भी आधुनिक उपकरण उस इलाके की निगरानी के लिए तैनात कर दिए गए। अतिरिक्त सुरक्षा बल मौके पर भेजे गए। सर्च ऑपरेशन लगातार जारी रखा ग़या है ताकि आतंकियों की भागने की संभावना को खत्म किया जा सके।

आतंकी संगठन को लेकर संकेत। कहां से और क्यों आए

सुरक्षा एजेंसियों को शक है जंगल मे छुपे आतंकी किसी पाकिस्तान आतंकी नेटवर्क से जुड़े हों सकते है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही की जाए गी।

क्यों है ये ऑपरेशन अहम।

यह ऑपरेशन बहुत ही अहम ऑपरेशन है। क्योंकि किश्तवाड़ा जैसे इलाके में आतंकी गतिविधियों के बड़ने की आशंका ज्यादा है इसी लिए सर्च ऑपरेशन जरूरी है। आने वाली अमरनाथ यात्रा और आने वाले महीनों की सुरक्षा के लिए ये ऑपरेशन जरूरी था। सुरक्षाबलों ने साफ साफ कहा है हमारे यहाँ आतंकियों के लिए कोई जगह नहीं है।

ऑपरेशन कब शुरु किया गया और क्यों

आतंकियों से जवानों की पहली मुठभेड़ 18 जनवरी को शुरु हुई थी। य़ह मुठभेड़ सोनार जंगल के उपरी और खतरनाक इलाके में शुरु हुई। इस मुठभेड़ में 8 जवान घायल हुए और तीन जवान गंभीर स्थिति के चलते हुए एयरलिफ्ट के जरिए हस्पताल भेज दिये गये। जवानों के घायल होने का कारण आतंकियों द्वारा चलायी गयी गोली और फेंके गए ग्रेनेड है। इस ऑपरेशन को खुफिया जानकारी मिलने और आने वाले कुछ महीनों को सुरक्षा देने के लिए चलाया गया था। और सबसे जरूरी अमरनाथ यात्रा के लिए भी चलाया गया ताकि यात्रा में किसी भी प्रकार की रुकावट ना हो। यात्रा पूरी श्रद्धा के साथ पूरी हो सके और ज्यादा से ज्यादा लोग पहुँच सके। क्योंकि आयी बारी कुछ न कुछ हमलों के कारण यात्रा में रुकावट आ जाती थी।

आतंकी इस जगह पर इन दिनों मे सबसे ज्यादा आते हैं क्योंकि यात्रा के समय ज्यादा से ज्यादा लोग एकत्रित होते हैं। और भीड़ में आतंकियों को अपना काम करने का मोका मिल जाता है। लेकिन अबकी बार नहीं। जवानों ने साफ साफ शब्दों मे बोल दिया है। आतंकियों के लिए यहां कोई जगह नहीं है

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