परीक्षा पे चर्चा: बच्चों के डर पर बोले मोदी जी, कहा– परीक्षा जिंदगी नहीं, बस एक पड़ाव है

By Mandeep Rohit

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परीक्षा पे चर्चा: बच्चों के डर पर बोले मोदी जी कहा परीक्षा जिंदगी नहीं बस एक पड़ाव है

Papar के समय बच्चों के मन में डर, घबराहट और दबाव होना आम बात है। इसी दबाव को कम करने और छात्रों को खुलकर बात करने का मौका देने के लिए परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के छात्रों से सीधे बातचीत की और उनकी परेशानियों को बहुत ही आसान शब्दों में समझा।

परीक्षा से डर क्यों लगता है? बच्चों ने खुलकर रखी बात

कार्यक्रम में बच्चों ने बिना झिझक अपनी बातें रखीं। कई छात्रों ने कहा कि परीक्षा नजदीक आते ही उन्हें नींद नहीं आती, मन घबराने लगता है और पढ़ा हुआ भी भूल जाते है। कुछ बच्चों ने बताया कि मोबाइल और सोशल मीडिया की वजह से ध्यान भटकता है, तो कुछ ने माता-पिता की उम्मीदों के दबाव की बात कही। बच्चों का कहना था कि “अगर नंबर कम आ गए या फेल हो गए तो आगे क्या होगा, यही डर सबसे ज्यादा परेशान करता है। माता पिता की मेहनत बेकार लगती है। फेल होने के बाद ऐसा लगता है जैसे हम अपने माता पिता के रुपे का सही इस्तमाल नहीं कर रहे।

मोदी जी का साफ संदेश: परीक्षा जीवन नहीं है

बच्चों की बात सुनने के बाद मोदी जी ने कहा कि परीक्षा को जीवन का अंत न समझें। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि परीक्षा सिर्फ जीवन का एक हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं। इंसान की पहचान उसके नंबरों से नहीं होती, बल्कि उसके हुनर, सोच और मेहनत से होती है। उन्होंने बच्चों को भरोसा दिलाया कि हर बच्चा किसी न किसी चीज़ में खास होता है।

तनाव को कंट्रोल कैसे करें? दिया आसान तरीका

प्रधानमंत्री ने कहा कि थोड़ा तनाव होना गलत नहीं है, लेकिन ज्यादा तनाव नुकसान करता है। मोदी जी ने बच्चों को सलाह दी कि पढ़ाई को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें, समय पर ब्रेक लें और आखिरी समय में घबराने के बजाय पहले से तैयारी करें। मोदी जी ने यह भी कहा कि तुलना करने की आदत छोड़नी होगी, क्योंकि हर बच्चा अलग होता है। सभी बच्चे एक जैसे नहीं होते और क्षमता भी अलग होता है।

माता पिता के लिए भी कहा की कभी भी अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से ना करें। अपने बच्चों का साथ दें और कभी भी अपने बच्चों को ताने ना मारे ना ही उन्हें निचा दिखाने की कोसिस ना करे। उनका बच्चा ये करता है वो करता है। हर बच्चे की सोच और दिमाग अलग अलग होता है। किसी को कुछ काम करना अच्छा लगता है और किसी को कुछ। इसलिए अपने बच्चे का कभी भी हौसला ना टूटे। उनका हौसला बढ़ाते रहें. और हमेशा एक दोस्त की तरह बात करें

मोबाइल और सोशल मीडिया पर भी दी सीख

मोदी जी ने मोबाइल को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि तकनीक बुरी नहीं है, लेकिन अगर वही हमें कंट्रोल करने लगे तो परेशानी होती है। मोबाइल का इस्तेमाल पढ़ाई और सीखने के लिए करें, न कि समय बर्बाद करने के लिए। उन्होंने बच्चों को समझाया कि मोबाइल उनके हाथ में होना चाहिए, वे मोबाइल के हाथ में नहीं।

माता-पिता के लिए भी अहम बात

इस कार्यक्रम में मोदी जी ने सिर्फ बच्चों से ही नहीं, बल्कि माता-पिता से भी अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों पर बेवजह दबाव न डालें, उनकी तुलना दूसरों से न करें और उनकी बातों को ध्यान से सुनें। जब घर का माहौल अच्छा होता है, तो बच्चे खुद बेहतर करने की कोशिश करते हैं।

फेल होना अंत नहीं, सीख की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने बच्चों को यह भी समझाया कि असफलता से डरना नहीं चाहिए। फेल होना कोई अपराध नहीं है। कई बार असफलता ही हमें सही रास्ता दिखाती है। जरूरी यह है कि हम हार मानकर बैठ न जाएं, बल्कि उससे सीख लेकर आगे बढ़ें।

आखिर में सबसे बड़ी बात

चर्चा का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि परीक्षा का डर मन से निकालो, खुद पर भरोसा रखो और खुशी को नंबरों से ऊपर रखो। जब मन शांत होगा, तो नतीजे अपने आप बेहतर आएंगे।

इस खबर से जुड़े सवाल (आपकी राय जानना चाहते हैं)

  1. क्या आज के समय में बच्चों पर परीक्षा का दबाव ज्यादा बढ़ गया है?
  2. क्या माता-पिता की उम्मीदें बच्चों के तनाव की बड़ी वजह बन रही हैं?
  3. स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ मानसिक सेहत पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए या नहीं?
  4. क्या ऐसे कार्यक्रम वाकई बच्चों का डर कम करने में मदद करते हैं?

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