अडानी ग्रुप के शेयरों में 3.4% से लेकर 14.54% तक की गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिकी SEC ने गौतम अडानी और उनके भतीजे को व्यक्तिगत रूप से ई-मेल के जरिए समन भेजने की अनुमति अदालत से मांगी है।
अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए “बेबुनियाद” बताया है।
अमेरिकी बाजार नियामक SEC (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन) ने अपनी ताज़ा फाइलिंग में कहा है कि भारत में डाक या व्यक्तिगत रूप से कानूनी समन (समन्स) भेजने की अनुमति नहीं है। इसी वजह से SEC ने 17 फरवरी 2025 को हेग कन्वेंशन के तहत भारत से औपचारिक कानूनी मदद की मांग की थी।
SEC के अनुसार, इसके बाद भारत के कानून मंत्रालय ने समन जारी करने से इनकार कर दिया। मंत्रालय ने मई 2025 में इस फैसले की वजह बताते हुए कहा कि SEC के कवर लेटर पर स्याही से हस्ताक्षर (ink signature) और आधिकारिक मुहर (seal) नहीं थी।
हालांकि, अमेरिकी नियामक SEC का कहना है कि हेग कन्वेंशन के तहत इन औपचारिकताओं की आवश्यकता नहीं होती, और इसलिए भारत का यह तर्क स्वीकार्य नहीं है।
- SEC भारत में समन भेजने में कानूनी अड़चनों का सामना कर रहा है
- भारत ने तकनीकी कारणों का हवाला देकर समन जारी करने से मना किया
- इस मुद्दे ने अडानी मामले को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कानूनी चर्चा में ला दिया है
23 जनवरी -भारत के अडानी समूह की कंपनियों का कुल मार्केट कैप शुक्रवार को करीब 12.5 अरब डॉलर घट गया। यह गिरावट तब आई जब अमेरिकी बाजार नियामक SEC ने कथित धोखाधड़ी और 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत योजना से जुड़े मामले में समूह के संस्थापक गौतम अडानी और ग्रुप एग्जीक्यूटिव सागर अडानी को व्यक्तिगत रूप से ई-मेल के जरिए समन भेजने की अनुमति अदालत से मांगी।
रॉयटर्स के मुताबिक, SEC की यह फाइलिंग गुरुवार को भारतीय बाजार बंद होने के बाद सामने आई थी।
शुक्रवार को अडानी एंटरप्राइजेज, जो ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी है, निफ्टी 50 में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वाला शेयर रहा। कंपनी के शेयर 10.65% टूटकर ₹1,864.20 पर बंद हुए, जबकि इस दौरान निफ्टी 50 इंडेक्स 0.95% की गिरावट के साथ बंद हुआ।
अडानी समूह के शेयरों में शुक्रवार को 3.4% से लेकर 14.54% तक की गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिका में दायर आरोपपत्र, जिसे नवंबर 2024 में सार्वजनिक (unseal) किया गया था, में अडानी समूह के कुछ अधिकारियों पर आरोप लगाया गया है कि वे अडानी ग्रीन एनर्जी से उत्पादित बिजली की खरीद के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने की साजिश में शामिल थे। अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी समूह की ही एक इकाई है।
अमेरिकी कानून के तहत, जो विदेशी कंपनियां अमेरिकी निवेशकों से पैसा जुटाती हैं, उन्हें विदेशों में कारोबार हासिल करने के लिए रिश्वत देने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, झूठे या भ्रामक बयानों के आधार पर निवेश मांगने पर भी सख्त रोक है।
फाइलिंग के मुताबिक, भारत सरकार पहले ही दो बार समन तामील कराने के अनुरोध को ठुकरा चुकी है, जिसे SEC पिछले साल से भेजने की कोशिश कर रहा है।
अडानी समूह ने इन आरोपों को बेहद निराधार बताते हुए कहा है कि वह अपने बचाव के लिए सभी संभव कानूनी विकल्पों का सहारा लेगा। हालांकि, 21 जनवरी की तारीख वाली SEC की ताजा फाइलिंग पर अडानी समूह ने रॉयटर्स की टिप्पणी मांगने पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अम्बरीश बालिगा के मुताबिक,
“मार्केट के निवेशकों को यह लग रहा था कि अब कोई मामला लंबित नहीं है और समूह को क्लीन चिट मिल चुकी है। ऐसे में SEC की यह फाइलिंग अचानक सामने आई है।”
बालिगा ने आगे कहा कि अगले कदमों की कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं होने के कारण यह मामला कम से कम अगले दो हफ्तों तक बाजार पर असर डाल सकता है, खासकर तब जब कुल मिलाकर बाजार की धारणा पहले से ही कमजोर बनी हुई है।











