Software Engineer Died in Noida: नोएडा में Yuvraj Mehta की मौत के बाद उसके पिता ने बताई सच्चाई।
नोएडा में हादसे में युवा इंजीनियर की मौत का मामला है। इसमें मृतक युवराज के पिता ने पुलिस से लिखित शिकायत की। नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है । युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने शिकायती पत्र में लिखा है कि स्थानीय लोगों ने बैरिकेडिंग
और रेफ्लेटर लगाने की मांग की थी। नोएडा अथॉरिटी ने लोगों की मांग पर ध्यान नहीं दिया। बैरिकेडिंग और रिफ्लेक्टर नहीं होने से दुर्घटनाएं होती हैं।
नोएडा में घने कोहरे के बीच दर्दनाक हादसे में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई। इस इंजीनियर की कार पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी जिससे उनकी जान चली गई। इस हादसे की कहानी सुनकर आप हिल जाएंगे।
नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही ने एक युवा इंजीनियर की जिंदगी की कहानी खत्म कर दी। युवराज मेहता नाम के सॉफ्टवेयर इंजीनियर गुरुग्राम के कंपनी में काम करते थे। नोएडा सेक्टर 150 में रहते थे। हादसे वाली रात करीब 12:00 बजे वह अपनी कार से घर लौट रहे थे। काफी घना कोहरा छाया था। सेक्टर 150 में उनकी कार हादसे का शिकार हो जाती है। युवराज की कार एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरती है। इस गड्ढे में पानी भरा हुआ था जिसमें उनकी कार समा गई। जिस जगह यह दुर्घटना हुई, वहां एक नाला भी था। जिसकी बाउंड्री वॉल टूटी हुई थी। युवराज की कार बाउंड्री वॉल को पार करते हुए पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। युवराज के परिवार के मुताबिक गड्ढे में कार के गिरने के बाद भी युवराज ने हिम्मत नहीं हारी। वो किसी तरह से कार से बाहर निकले और कार के ऊपर चढ़कर उन्होंने अपने पिता को फोन किया और मदद के लिए कहा। युवराज ने अपने पिता से कहा कि उन्हें तैरना नहीं आता है और उनकी जान खतरे में है। उन्होंने चिल्लाकर और मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर वहां से गुजर रहे लोगों से मदद मांगी। लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने पुलिस को सूचना दी। बताया गया है कि पुलिस की टीम करीब आधा घंटा बाद घटना स्थल पर पहुंची। जब तक युवराज की कार पानी में डूब चुकी थी।
नोएडा में जहां इंजीनियर की दर्दनाक मौत हो गई। प्राधिकरण की बड़ी लापरवाही की वजह से बड़ा हादसा हुआ है। जहां जो मोड था वहां ना रिफ्लेक्टर थे ना किसी का साइन प्रकार का साइन मोड था। तो कहीं ना कहीं परिवार भी गम में डूबा हुआ। इंजीनियर के पिता का कहना है कि घर में इकलौते थे और बहुत जल्द ही शादी होने वाली थी। हादसे के वक्त जब नाला में गिर गया तो उसने कॉल किया था कि पापा मैं नाला में गिर गया हूं मुझे बचा लो। मैं जिस हालत में था बेड से उठा और दौड़ता हुआ गया। करीब 12 के आसपास 12:00 बजे रात में। लेकिन नाला मैं दूसरे नाले में खोजने चला गया। जो एस पार्कवे के आगे नाला है उसमें। फिर वहां से मैंने फोन किया बेटा यहां तो तुम दिखाई नहीं पा रहे। तो बोला कि नहीं घर के पास वाले नाले में फिर वहां से वापस हुए लेकिन कोहरा इतना गहरा था कि कोई गाड़ी वाला मिल नहीं रहा था तैयार नहीं हो रहा था पैदल कुछ दूर चला फिर एक कार वाला मिला फिर धीरे-धीरे वो कार चलाया कम से कम 40 मिनट हमको वहां पहुंचने में लग गया फिर मैंने कहा बेटा मैं आ गया हूं फोन किया उसको कहा कि पापा अब बचा लो अब यहां पे फिर मैंने 112 पर फोन किया वहां से पुलिस कुछ देर में करीब 20 मिनट 25 मिनट में पुलिस आ फिर सब्सिक्वेंटली उन्होंने फायर ब्रिगेड को फोन किया। तब तक काफी लेट हो रहा था और वो बोला था पापा धीरे-धीरे ये गाड़ी डूब रही है।
पुलिस कितनी देर बाद पहुंची? क्रेन हेडर कितनी देर बाद पहुंचा?
पिता ने बताया कि उतना हम ध्यान नहीं दे रहे थे। हमारा फोकस था कि किसी तरह कुछ कोई सहायता मिले जो उसको बचा सके। मेन उस तक पहुंच सके कोई तैर करके। मुझे तैरना नहीं आता। मैं जंप कर जाता उसमें। कोई आसपास स्थानीय लोग भी ऐसे नहीं गुजर रहे थे जो स्थानीय लोग केवल या तो वीडियो लेने में व्यस्त थे या तमासवीन बने हुए थे। कोई भी सहायता के लिए आगे बढ़ नहीं रहा था। वो समझिए वो इंजॉय ही कर रहे थे। वहां पर सीन को इंजॉय लगभग कितनी देर बाद पुलिस और हेडर कैन ले पहुंचे। पुलिस तो आई लेकिन उसके बाद उन्होंने जो टीम बुलाई उसके पास एडिक्वेट इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। केवल रस्सियां वगैरह थी। वो लोग बोट से वहां तक पहुंचते एनडीआरएफ की टीम या फायर ब्रिगेड की टीम तो मेरा बेटा बचाया जा सकता था। फर्स्ट तो ये था कि जो वहां पर अगर रिफ्लेक्टर होता तो मेरा बेटा इसका शिकार ही नहीं होता। जो टर्निंग पर राइट टर्न होता है वहां ब्लाइंड था और वो सीधा स्ट्रेट वे नाले में चला गया गाड़ी के साथ। वहां भी एक इंडिकेटर होना चाहिए था। बैरियर होना चाहिए था ताकि वो उस तरफ गाड़ी जाए ही नहीं। अगर जाए भी तो उस बैरियर से टकरा जाए और वहीं रह जाए। क्योंकि नाला काफी गहरा और डेंजरस है। पानी है और मड भी है पानी के साथ। नोएडा अथॉरिटी की ही लापरवाही क्योंकि वही इसके डेवलपमेंट का पूरा प्रभारी है। पिता है और पिता का दर्द आप समझ सकते हैं। युवा था इंजीनियर तो कहीं ना कहीं जो पिता है तो गम के साए में डूबे हुए हैं और सख्त कारवाई की मांग कर रहे हैं ताकि आगे इस तरह और कोई हादसा ना हो सके।
यह घटना कैसे घटी? उस रात युवराज के साथ क्या हुआ था?
नोएडा में एक बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे के अंदर गिरकर इंजीनियर की मौत हो गई। जिस जगह इंजीनियर की मौत हुई है वहीं हम मौजूद हैं। और कई डिलीवरी बॉय भी यहां मौके पर मौजूद थे। पुलिस भी मौके पर मौजूद थी। यहां पुलिस वाले भी मौके पे खड़े थे। फैक्ट वाले भी थे। यहां किसी ने बचाया ही नहीं। बचाना चाहते तो बच जाता। वो कितनी देर तक वो बचाने की गुहार लगाता रहा। वो कम से कम 2 घंटा दो 12:00 बजे गिरी थी गाड़ी और 2:00 बजे तक 2 – 2:30 बजे के करीब में डूब गया हुआ था वो तो गाड़ी के ऊपर छत पे खड़ा हुआ था छत पे खड़ा था फ़ोन की टॉर्च जला रखी थी उसने अच्छा टॉर्चर जलाया मदद में हां हाथ भी जोड़ रहा था बेचारा रो रहा था बहुत बुरी तरह ऐसी मौत तो मैंने जिंदगी में देखी भी नहीं है सुनी है मैंने देखते देखते ही डूब गया वो हां बेचारा हाथ भी रो रहा है उसका बाप भी बेचारा खड़ा था पुलिस वाले थे मौके पे खड़े थे देख रहे थे लड़का भी कितने पुलिस वाले थे अभी कुछ दिन पहले भी अभी 15-20 दिन हो गए ट्रक वाला बचाया था। उसी लड़के ने बचाया था मोनी ने। हम वो भी ऐसे ही गिर गया था। ऐसे ही खिड़की खोली उन्होंने उसे पता ना थी गड्ढा आया। वो ऐसे ही कूद गया था। वो भी तभी ऑर्डर देने आया था। तो यहीं पे गिर यहीं पे गिरते हैं लोग। हां इसी पे गिरते हैं। ट्रक का टूटा हुआ था ये। तो किसने बचाया उस लड़के को? मोनी। क्या करता है वो? और Flipkart में जॉब करता है। अच्छा वो पानी में कूद गया था। हां पानी में कूद गया था। रस्सी बात है। और पुलिस वाले नहीं कूदे। पुलिस वाले नहीं कूदे। अब पुलिस वाले और ये बोल रहे थे 15-20 मिनट पहले आता तो बच जाता। हम और 15-20 जब तुम मौके पे खड़े हो तुम तब ना बेचारे तो वो तो जो अचानक आर्डर देना आता था लीग राउंड में उस समय और भी लोग हैं इनसे भी बात करने की कोशिश करेंगे क्या जानकारी मिली आप लोगों को किस तरीके का हादसा यहां हुआ है इस जगह पांच छह गाड़ी गिर चुकी है दो-ती साल में तो शिकायत नहीं करी पा रही शिकायत खूब हो रही है आए के यहां यहां दीवार से करके चला जा रहा पानी रोक रहे ये बैरिकेडिंग बाद में लगाएं पहले ये तो अभी लगाई उसके बाद में मडवा अब गिरा हो फिर ये बिल्डर लड़ पड़े अब क्या कर रहे हो तुम इसको जब ना कर सके और मडवे फिर रात को उठा के ले गए जमीन किसकी है ये ऑथर की बिल्डर बेच रखी है तो कितने दिन से काम बंद पड़ा हुआ है ये अब 10 साल हो गए कम से कम 10 साल से ऐसे ही गड्ढा है इसी नाले के पास से वो गाड़ी गिरी और यहां से कोहरा ज्यादा होने की वजह से इसी नाले की बाउंड्री टूटी और बाउंड्री टूटने के बाद तकरीबन 70 फीट के आसपास जो है वो गड्ढा यहां पर बताया जा रहा है। किसी बिल्डर कंपनी को यह जमीन दी गई थी और 10 साल के आसपास का वक्तहो गया है। इसी तरीके का गड्ढा बना हुआ है। इस गड्ढे को ना तो भरने की कोशिश प्राधिकरण की तरफ से की गई ना यहां पर किसी तरह की कारवाई की और यही पानी यहां पर भरा हुआ है। कई गाड़ियां इस तरीके से गिर चुकी हैं। जो डिलीवरी बॉय है डिलीवरी बॉय द्वारा पानी में कूदकर बचाने की कोशिश की गई। लोगों का यह भी आरोप है कि पुलिस की टीमें यहां पर खड़ी रही लेकिन किसी तरीके की मदद पुलिस की तरफ से नहीं की गई। जब एनडीआरएफ की टीम आई तब तक काफी देर हो चुकी थी। हाथ जोड़कर गुहार लगाता रहा। इंजीनियर मदद की गुहार लगाता रहा। उसके पिता भी यहां पर गुहार लगाते रहे। लेकिन किसी तरीके की मदद नहीं मिली। और नोएडा जैसे हाईटेक शहर में इस तरीके का दर्दनाक हादसा होना, कई इस तरीके के सवाल खड़े करता है।
नोएडा प्राधिकरण की नालों को देखरेख करने की बात की जाए तो करोड़ो रुपए का बजट हर साल केवल नालों की देखरेख और साफ सफाई के लिए किया जाता है। बावजूद उसके इस तरीके की तस्वीर यहां पर सामने आई। इस मामले पर नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही पर 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक हादसे में मौत हुई। । इसके बाद एनडीआरएफ की टीमें पहुंची और रेस्क्यू किया गया जहां पर मृत घोषित कर दिया गया था युवराज को। लेकिन सबसे बड़ी लापरवाही और सबसे बड़ा सवाल जो है वो नोएडा अथॉरिटी से बनता है। कि वो जो गड्ढा है जो खाई है वो जिस बिल्डर को दिया गया था उस पर नोएडा अथॉरिटी का कब्जा है। नोएडा अथॉरिटी के अंडर में है वो और ना वहां पर किसी भी तरीके का कोई साइन बोर्ड है ना ही कोई रिफ्लेक्टर है और स्थानीय लोगों का यह कहना है कि वहां पर बार-बार ऐसे हादसे जो हैं वह होते रहते हैं। कुछ दिन पहले भी वहां पर एक ट्रक ड्राइवर जो है वो भी उसी गड्ढे में गिरा था। जिसके बाद एक डिलीवरी बॉय ने उसकी जान बचाई। फिलहाल हमारी मौजूदगी नोएडा अथॉरिटी के दफ्तर के ठीक बाहर है। आज रविवार का दिन है। यहां पर कोई है नहीं। लेकिन इस हादसे के बाद जिस तरीके से सवाल खड़े हो रहे हैं। अभी तक नोएडा अथॉरिटी की तरफ से कोई भी एक्शन जो है वो नहीं लिया गया है। ना ही किसी अधिकारी को बर्खास्त किया गया है और ना ही
किसी से ऐसा सवाल पूछा गया है। ना ही किसी को नोटिस दिया गया है। तो इंतजार यह है कि आखिर कब नोएडा अथॉरिटी के कान खड़े होंगे। कब जो है वो एक्शन लेगी और कब ऐसे हादसे बंद होंगे? कि कि अगर नोएडा की बात करें तो नोएडा हाई हाईटेक सिटी में आता है और नोएडा में अगर
ऐसी घटना होती है जहां पर एक इंसान जो है वो प्रशासन के सामने दो से ढाई घंटे तक अपनी जान की गुहार लगाता है और उसके बावजूद प्रशासन उसको नहीं बचा पाता है तो सवाल तो पूछना बनता है।









