22 जनवरी को बाजार में भारी बिकवाली के पीछे प्रॉफिट बुकिंग और FII की बिक्री जैसे प्रमुख कारण रहे |
भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में 22 जनवरी को तेजी के बाद मुनाफावसूली देखने को मिली। वैश्विक बाजारों में आई मजबूती के चलते घरेलू बाजार में शुरुआती कारोबार में उछाल रहा। यह तेजी तब आई जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी से कदम पीछे खींच लिया और ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए बल प्रयोग की संभावना को भी खारिज कर दिया।
शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 1.09% की बढ़त के साथ 25,430.30 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि बीएसई सेंसेक्स 1.03% चढ़कर 82,751.95 पर कारोबार करता नजर आया।
हालांकि, दोपहर के शुरुआती सत्र में दिन के ऊपरी स्तरों से मुनाफावसूली देखी गई। इस दौरान सेंसेक्स अपने उच्चतम स्तर से करीब 650 अंकों की गिरावट के साथ फिसल गया, जबकि निफ्टी 25,250 के आसपास ट्रेड करता दिखा।
दोपहर 12:46 बजे, सेंसेक्स 250.85 अंक या 0.31% की बढ़त के साथ 82,160.48 पर था, वहीं निफ्टी 96.45 अंक या 0.38% की तेजी के साथ 25,253.95 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
बाजार की बात करें तो इस समय 2,611 शेयरों में तेजी, 1,116 शेयरों में गिरावट, जबकि 147 शेयरों में कोई बदलाव नहीं देखा गया।
Profit booking
तीन दिनों की लगातार गिरावट के बाद बाजार में आई तेज रिकवरी के चलते मुनाफावसूली देखने को मिली। व्यापक खरीदारी के बाद निवेशकों ने ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी। 22 जनवरी को सुबह 11 बजे, बैंक निफ्टी दिन के उच्च स्तर से करीब 1% फिसल गया, हालांकि उस समय यह 0.16% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था।
Choice Broking के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह के मुताबिक, 25,250 से 25,300 का स्तर निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस बन गया है और इस दायरे तक कोई भी रिकवरी आने पर बिकवाली का दबाव रह सकता है। उन्होंने कहा कि 25,000 का स्तर निफ्टी के लिए अहम मनोवैज्ञानिक और तकनीकी सपोर्ट है। अगर यह स्तर टूटता है तो बाजार 24,800–24,900 की ओर और फिसल सकता है। हालांकि, मोमेंटम इंडिकेटर्स कमजोर बने हुए हैं, लेकिन ओवरसोल्ड स्थिति के चलते तेजी देखने को मिल सकती है।
बैंकिंग सेक्टर पर बात करते हुए आकाश शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी 59,700–60,000 के दायरे को दोबारा हासिल करने में नाकाम रहा है, जिससे बैंक शेयरों को लेकर सतर्कता बनी हुई है। बैंक निफ्टी के लिए 58,500–58,600 का स्तर तत्काल सपोर्ट है, जबकि बेहतर नतीजों और बाजार में भरोसे की वापसी के बिना तेजी सीमित रह सकती है।
बीते तीन कारोबारी सत्रों में निफ्टी और सेंसेक्स करीब 2% तक गिर चुके हैं। इसकी वजह व्यापार और भू-राजनीतिक चिंताएं, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर तिमाही नतीजे रहे।
HDFC बैंक और ICICI बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में मामूली गिरावट देखने को मिली, जिससे 22 जनवरी को बाजार की तेजी सीमित रही।
मिडकैप शेयरों में भी दबाव रहा और निफ्टी मिडकैप इंडेक्स दिन के ऊपरी स्तर से 1.26% टूट गया।
निफ्टी 50 में शामिल कंपनियों में SBI लाइफ इंश्योरेंस सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर रहा, जिसमें करीब 2% की कमजोरी आई।
FII की बिकवाली जारी
21 जनवरी को भी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली जारी रही। बाजार के रुझान पर टिप्पणी करते हुए आकाश शाह ने कहा,
फंड फ्लो फिलहाल बाजार की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा फैक्टर बना हुआ है। FII लगातार नेट सेलर बने हुए हैं, जिससे बेंचमार्क इंडेक्स पर दबाव बना हुआ है। हालांकि DII की चुनिंदा खरीदारी बाजार को और बड़ी गिरावट से बचा रही है।
एक्सचेंज के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक, 21 जनवरी को FIIs/FPIs ने भारतीय शेयर बाजार में ₹1,788 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की। वहीं, निवेशकों (DII) ने उसी दिन ₹4,520 करोड़ के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की।
आंकड़ों के अनुसार, DII ने कुल ₹17,387 करोड़ के शेयर खरीदे और ₹12,867 करोड़ के शेयर बेचे। इसके उलट, FIIs ने ₹15,371 करोड़ की खरीदारी की, लेकिन ₹17,159 करोड़ के शेयरों की बिक्री की।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने बाजार के रुझान पर टिप्पणी करते हुए कहा, 2025 में बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा, जबकि उस दौरान DII ने ₹7.44 लाख करोड़ का रिकॉर्ड निवेश किया था, जो कि FII की कुल बिकवाली ₹1.66 लाख करोड़ से कहीं ज्यादा था। इसके बावजूद निफ्टी का रिटर्न सिर्फ 10% रहा। इसकी मुख्य वजह कमजोर अर्निंग ग्रोथ और भारत में ऊंचे वैल्यूएशन रहे। इसके अलावा अमेरिका-भारत ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।”
उन्होंने आगे कहा, जब तक बाजार में तेजी के लिए कोई पॉजिटिव ट्रिगर नहीं मिलता, तब तक FII की बिकवाली जारी रह सकती है। 2025 में जिस AI थीम ने शेयर बाजार को लीड किया था, वह रुझान 2026 की शुरुआत में भी बना हुआ है। हालांकि, इस ट्रेंड में 2026 के किसी चरण में बदलाव देखने को मिल सकता है।











